हिंदी साहित्य और स्त्रीवादी चिंतन का नया आलोक : प्रोफेसर  सविता सिंह

The third lecture in the ‘Sandhan Vyakhyanmala’ series  – initiated by New Socialist Initiative ( Hindi Pradesh) will be delivered by Prof Savita Singh, leading poetess, feminist scholar and writer on Saturday 19 th February 2022, at 6 PM (IST). She will be speaking on ‘Hindi Literature and New Light of Feminist Thought   (हिंदी साहित्य और स्त्रीवादी चिंतन का नया आलोक’ )

The focus of this lecture series – as you might be aware – is on the Hindi belt, especially, on literature, culture, society and politics of the Hindi region where we intend to invite writers, scholars with a forward looking, progressive viewpoint to share their concerns.

You are cordially invited to attend and participate in the ensuing discussion.

This online lecture would be held on zoom and will also be shared on facebook as well : :facebook.com/newsocialistinitiative.nsi

 Zoom Link

https://us02web.zoom.us/j/89853669536?pwd=OTVkZUNKejhNem5hODE5ZEsveGZTQT09

Meeting ID : 898 5366 9536
Passcode  : 825447

 New Socialist Initiative ( Hindi Pradesh)

संधान व्याख्यानमाला – तीसरा वक्तव्य

वक्ता: प्रोफ़ेसर सविता सिंह
प्रसिद्ध कवयित्री, नारीवादी सिद्धांतकार और लेखिका

विषय: ‘हिंदी साहित्य और स्त्रीवादी चिंतन का नया आलोक’

19 फरवरी शाम 6बजे

सारांश
स्त्रीवाद को लेकर हिंदी साहित्य में आजकल बहुत सारी बातें हो रही हैं। वे अपनी अंतर्वस्तु में नई भी हैं और पुरानी भी। यह भी कह सकते हैं की पितृसत्ता ने अपने भी स्त्रीवादी विमर्श तैयार किए हैं स्त्रियों के लिए। जब स्त्रियां इसे अपना लेती हैं, अपना कह कर इसे किसी वसन की तरह पहन लेती हैं  तो जरूरी हो जाता है इनपर गहनता और गहराई से बात करना। वह एक बात थी जब स्त्री लेखिकाओं ने अपने को स्त्रीवादी होने या कहे जाने से परहेज किया, और यह दूसरी जब स्त्रीवाद के अनेक रूप गढ़े गए। भारतीय परिवेश में स्त्री विमर्श के भीतर बहुलता और भिन्नता तो होनी ही थी। इसी विषय पर हम क्यों न इसपर बात करें। क्या हिंदी में स्त्रीवादी लेखन कोई नया समाज बनाने के संकल्प से लिखा जा रहा है या फिर अभी भी पितृसत्ता का सह उत्पादन ही हो रहा है, यह हमारे लिए चिंता और बहस का मुद्दा बनना ही चाहिए।

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