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जातिगत भेदभाव को लेकर कब ख़त्म होगा भारतीयों का दोहरापन

भारतीयों के मन में व्याप्त दोहरापन यही है कि वह ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर होने वाली ज़्यादतियों से उद्वेलित दिखते हैं, पर अपने यहां के संस्थानों में आए दिन दलित-आदिवासी या अल्पसंख्यक छात्रों के साथ होने वाली ज़्यादतियों को सहजबोध का हिस्सा मानकर चलते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

‘जाति समस्या- सैद्धांतिक और व्यावहारिक तौर पर एक विकराल मामला है. व्यावहारिक तौर पर देखें तो वह एक ऐसी संस्था है जो प्रचंड परिणामों का संकेत देती है. वह एक स्थानीय समस्या है, लेकिन एक ऐसी समस्या जो बड़ी क्षति को जन्म दे सकती है. जब तक भारत में जाति अस्तित्व में है, हिंदुओं के लिए यह संभव नहीं होगा कि वह अंतरजातीय विवाह करें या बाहरी लोगों के साथ सामाजिक अंतर्क्रिया बढ़ाएं. और अगर हिंदू पृथ्वी के दूसरे हिस्सों में पहुंचते हैं, तो फिर भारतीय जाति विश्व समस्या बनेगी.’

– डॉ. बीआर आंबेडकर (1916)

वर्ष 1916 के मई महीने में कोलंबिया विश्वविद्यालय में मानव वंशशास्त्र विभाग में सेमिनार में डॉ. आंबेडकर ने ‘भारत में जाति- उनकी प्रणाली, उनका उद्गम और विकास’ (Castes In India- Their Mechanism, Genesis and Development) पर अपना पेपर पढ़ा था.

पेपर पढ़ते हुए उन्होंने इस बात की भविष्यवाणी की थी कि किस तरह एक दिन जाति विश्व समस्या भी बनेगी, उनके बोल थे, ‘अगर हिंदू दुनिया के दूसरे हिस्सों में पहुंचते हैं, तो फिर भारतीय जाति विश्व समस्या बनेगी.’

उनके इस वक्तव्य के 104 साल बाद उसी अमेरिका के कैलिफोर्निया से आई यह खबर इसी बात की ताईद करती है.

ध्यान रहे कैलीफोर्निया राज्य सरकार की तरफ से वहां की एक अग्रणी बहुदेशीय कंपनी सिस्को सिस्टम्स के खिलाफ दायर एक मुकदमे के बहाने यही बात नए सिरे से उजागर हुई है, जिसका फोकस वहां कार्यरत एक दलित इंजीनियर के साथ वहां तैनात दो कथित ऊंची जाति के इंजीनियर द्वारा जातिगत भेदभाव की घटना से है. Continue reading जातिगत भेदभाव को लेकर कब ख़त्म होगा भारतीयों का दोहरापन