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फेंके जा, फेंके जा – ये तीन सौ टॉफी भी गुजरात मॉडल की देन हैं!

चला मुरारी हीरो बनने. मगर इत्ती जल्दी काहे की – टॉफी और ट्रॉफी का फ़र्क तो जान ले पहले. भक्तों और भक्तिनों से ही पूछ लिया होता तो वो भी बता देते. मगर इत्ता भी सब्र किसे जब सामने कुर्सी दिखाई दे रही हो. वो भी परधान मंत्री की. और जब सारे मुनादी करने वाले, बैंड बाजे वाले चुगलिया, फुगलिया, शर्मा, गुप्ता, कंवल, फंवल में बादशाह के नए लिबास की तारीफ़ों के पुल बांधने की होड़ लगी हो, तो कौन है सुसरा जो हमारे सामने बोल सके है? अब मुरारी बोलता है और बैंड बाजे वाले दाद देते हैं. लीजिये समाअत  फरमाइए उन्हीं की ज़ुबानी और आनंद लीजिये: