Tag Archives: प्रकृति

करोना से ग़लत सबक़ लेना घातक हो सकता है : राजेन्द्र चौधरी

Guest post by RAJINDER CHAUDHARY

पिछले दिनों हम ने ‘करोना के कुछ ज़रूरी सबक़’ पर चर्चा की थी. पर बड़ी संभावना यह है कि करोना के आधे अधूरे या गलत सबक निकाले जाएँ.  इस के लिए भी हमें तैयार रहना चाहिए.

बिलकुल गलत सबकों पर आने से पहले, कुछ संभावित आधे अधूरे सबकों की चर्चा कर लें. निश्चित तौर पर करोना के बाद की दुनिया में वैश्वीकरण ढलान पर होगा; अब आर्थिक वैश्वीकरण बढ़ने के स्थान पर घटेगा. विशेष तौर पर दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी वस्तुओं के मामले में राष्ट्र आत्मनिर्भर होने की कोशिश करेंगे; करनी भी चाहिए पर यह अधूरा निष्कर्ष होगा. केवल स्वास्थ्य सम्बन्धी मामलों में ही नहीं, बल्कि जहाँ तक संभव हो हर मामले में आत्मनिर्भर होने की कोशिश होनी चाहिए. इस से भी आगे बढ़ कर यह आत्मनिर्भरता केवल राष्ट्रीय स्तर पर न हो कर स्थानीय स्तर पर भी होनी चाहिए.

Continue reading करोना से ग़लत सबक़ लेना घातक हो सकता है : राजेन्द्र चौधरी