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रौशनी के बीज बोने का माददा – ‘अंधविश्वास उन्मूलन’ पुस्तकत्रयी के बहाने चन्द बातें 

 

(‘पहल’ के आगामी अंक हेतु )

Andhavishwas Unmoolan : Vichar - 1

1.

स्मशान में कवि सम्मेलन और वह भी अमावस की पूरी रात।

पिछले साल के अन्त में पुणे से आयी इस ख़बर की तरफ बहुत कम लोगों का ध्यान गया था। ( देखें इंडियन एक्स्प्रेस 14 नवम्बर 2015) उधर शहर में लोग दीपावली मना रहे थे और वहां सैकड़ों की तादाद मंे एकत्रित लोगों के बीच कविताएं पढ़ी जा रही थीं, एक कविता संग्रह का विमोचन भी हो रहा था, कुछ सांस्कृतिक  समूह भी बीच बीच में अपनी प्रस्तुतियां दे रहे थे। पुणे के उपनगर बोपोडी की स्मशानभूमि का परिसर उस अलग ढंग के कार्यक्रम का गवाह बना था।

‘अमावस्या की पवित्र रात में स्मशान में कवि सम्मेलन’ शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक थे , महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति – जिसके निर्माण में शहीद विचारक डा नरेन्द्र दाभोलकर ने पहल ली थी – तथा सिद्धार्थ संघ और सिद्धार्थ महिला संघ। समिति के सदस्यों द्वारा गाया एक गीत काफी चर्चित हुआ, जिसके बोल थे ‘बो रहे हैं हम प्रकाश बीज’। भूतों-प्रेतों के ‘अस्तित्व’ या उनके ‘विचरण’ को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांत धारणाओं को चुनौती देने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम ने बरबस कुछ समय पहले कर्नाटक के बेलागावी सिटी कार्पोरेशन के अन्तर्गत आते वैंकुंठ धाम स्मशान में हुए एक अन्य आयोजन की याद ताजा कर दी थी,  जहां कर्नाटक के उत्पादनशुल्क/एक्साईज मंत्राी जनाब सतीश जरकीहोली ने सैकड़ों लोगों के साथ वहीं रात बीतायी थी अंौर वहां भोजन भी किया था। याद रहे कि महाराष्ट्र की तर्ज पर कर्नाटक विधानसभा में अंधश्रद्धा विरोधी बिल लाने में अत्यधिक सक्रिय रहे मंत्राीमहोदय दरअसल लोगों के मन में व्याप्त इस मिथक को दूर करना चाहते थे कि ऐसे स्थानों पर ‘भूत निवास’ करते हैं। Continue reading रौशनी के बीज बोने का माददा – ‘अंधविश्वास उन्मूलन’ पुस्तकत्रयी के बहाने चन्द बातें 

श्रीराम सेने से नफरत, सनातन संस्था पर इनायत !

उत्तरी गोवा के बंडोरा गांव की पंचायत का एक फैसला पिछले दिनों राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया। उन्होंने न तो किसी नए सड़क की मांग की न किसी स्कूल की। वे एक संस्था पर पाबंदी चाहते थे। वे चाहते थे कि उस संस्था का मुख्यालय गांव से हटे। उनका कहना था कि उस संस्था के चलते गांव की बदनामी हो रही है। उसी के कारण आए दिन पुलिस और गुप्तचर एजेंसियों के लोग वहां पहुंचते रहते हैं। उनका कहना था कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो इसके लिए वे जल्द ही आंदोलन शुरू करेंगे। गौरतलब है कि कुछ साल पहले भी उन्होंने यह मांग की थी, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया था। दरअसल हाल के दिनों में नए सिरे से चर्चा में आई ‘सनातन संस्था’ का मुख्यालय इसी गांव में है।

नैतिक पहरेदारी

यह वही संस्था है, जिससे जुड़े सांगली के समीर गायकवाड़ को पिछले दिनों कॉमरेड गोविंद पानसरे की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस साजिश में उसके अन्य साथी भी पकड़े गए। पुलिस को उसके अन्य कार्यकर्ताओं रुद्र पाटिल और सारंग अकोलकर की भी तलाश है, जिन्हें अक्टूबर 2009 के मडगांव बम विस्फोट में फरार घोषित किया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने बयान दिया कि लंबी निगरानी के बाद ठोस सुरागों के आधार पर ही ये गिरफ्तारियां हुई हैं। पानसरे की हत्या की जांच के आगे बढ़ने के क्रम में इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि 2013 में हुईर डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या और पिछले दिनों कर्नाटक में हुए प्रोफेसर कलबुर्गी के मर्डर में भी आपसी रिश्ता रहा है।

आध्यात्मिकता की बात करने वाली, मगर अपने कार्यकर्ताओं की हिंसक कार्रवाइयों के कारण विवादास्पद बनी ‘सनातन संस्था’ पर पाबंदी की मांग कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा वामपंथी दलों ने भी की है। फिलवक्त बीजेपी इस बात को लेकर असहज है कि संस्था पर पाबंदी की मांग उठाने वाले अपने ही विधायक विष्णु वाघ को क्या जवाब दे? वाघ ने अतिवादी संगठनों पर पाबंदी को लेकर सरकार के दोहरे रुख को उजागर किया है। उन्होंने सनातन संस्था की तुलना प्रतिबंधित संगठन ‘सिमी’ (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) से करते हुए दलील दी है कि इस संस्था पर अगर बाहर के कई देशों में पाबंदी लग सकती है, तो यहां क्यों नहीं? अगर प्रमोद मुतालिक की अगुआई वाली श्रीराम सेने की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है तो सनातन संस्था पर क्यों नहीं? Continue reading श्रीराम सेने से नफरत, सनातन संस्था पर इनायत !