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पेटलावद विस्फोट – मौतों पर बजती तालियाँ : जसबीर चावला

Guest Post by Jasveer Chawla

Madhya Pradesh CM Shivraj Singh Chouhan, who visited the blast site at Petlawad near Jhabua this morning, faced protests from angry residents               (Photo courtesy : http://www.odishanewsinsight.com)

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद क़स्बे में बस स्टेंड के पास भीड भरे स्थान पर रहवासी और व्यवसायिक क्षेत्र के एक मकान में अवैध रूप से रखे विस्फोटक जिलेटिन के भंडार में शनिवार विस्फोट हो गया. विस्फोट से ९० लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हैं जिनमें से कई की हालत गंभीर है,जिन्हे इंदौर,दाहोद अादि जगह भेजा गया.

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को घटनास्थल का दौरा किया और सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि सरकार हायकोर्ट के किसी जज से इसकी न्यायिक जाँच करवायेगी.दोषियों को दंडित किया जायेगा. मृतकों के परिजनों को १० लाख रुपये और घायलों के इलाज का सारा खर्च सरकार करेगी और पीड़ित परिवारों के रोजगार पर भी सरकार ध्यान देगी.

✔️ ‘व्यापमं’ प्रदेश के मुख्यमंत्री जब ये घोषणायें कर रहे थे तो उनके पास खड़े उनके दल के लोग उनकी ‘भामाशाही’ घोषणाओं पर बार बार तालियाँ बजा कर स्वागत कर रहे थे.सामने दुखी और पीड़ितों का विरोध करता हुजूम था.

✔️ इस ‘विस्फोट’ से सीधे प्रश्न उठते है.मध्यप्रदेश कोई सीमावर्ती राज्य नहीं है जहाँ कोई आतंकवादी आ गया और मुठभेड़ हुई और मकान में रखे विस्फोटक सुलग उठे ना ऐसी आतंकवादी घटना है जिसमे आतंकवादी बाजार/घर / ट्रेन/बस में बम प्लांट कर देते हैं और रिमोट से या आत्मघाती तरीके से विस्फोट कर देते हैं.ऐसा कुछ नहीं था.

यहां के जैन समुदाय का एक व्यापारी (आतंकवादी की कोई जाति या धर्म नही होता,ऐसा ही लिखते हैं ना ?) जो भाजपा के स्थानीय व्यापारिक प्रकोष्ठ का पदाधिकारी था (अपराधी किसी भी राजनैतिक दल का हो सकता है ?) १० वर्षों से क़स्बे में एवं मध्य व्यवसायिक क्षेत्र में अवैध रूप से किराये के मकान में भारी मात्रा में रखे जिलेटिन डायनामाइट का भंडारण कर रहा था.

इतनें वर्षों तक पुलिस, प्रशासन सोया था जो वहाँ पर इतनी मात्रा में कुएँ /खदानों में वैध/अवैध विस्फोट के लिये जिलेटिन का भंडारण हो रहा था ? Continue reading पेटलावद विस्फोट – मौतों पर बजती तालियाँ : जसबीर चावला

फेंके जा, फेंके जा – ये तीन सौ टॉफी भी गुजरात मॉडल की देन हैं!

चला मुरारी हीरो बनने. मगर इत्ती जल्दी काहे की – टॉफी और ट्रॉफी का फ़र्क तो जान ले पहले. भक्तों और भक्तिनों से ही पूछ लिया होता तो वो भी बता देते. मगर इत्ता भी सब्र किसे जब सामने कुर्सी दिखाई दे रही हो. वो भी परधान मंत्री की. और जब सारे मुनादी करने वाले, बैंड बाजे वाले चुगलिया, फुगलिया, शर्मा, गुप्ता, कंवल, फंवल में बादशाह के नए लिबास की तारीफ़ों के पुल बांधने की होड़ लगी हो, तो कौन है सुसरा जो हमारे सामने बोल सके है? अब मुरारी बोलता है और बैंड बाजे वाले दाद देते हैं. लीजिये समाअत  फरमाइए उन्हीं की ज़ुबानी और आनंद लीजिये:

आओ हम ढोएं हिन्दुत्व की पालकी


अस्सी के दशक में उत्तर भारत के कुछ शहरों में एक पोस्टर देखने को मिलता था। 

रामबिलास पासवान के तस्वीर वाले उस पोस्टर के नीचे एक नारा लिखा रहता था ‘मैं उस घर में दिया जलाने चला हूं, जिस घर में अंधेरा है।’ उस वक्त़ यह गुमान किसे हो सकता था कि अपनी राजनीतिक यात्रा में वह दो दफा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठन भारतीय जनता पार्टी का चिराग़ रौशन करने पहुंच जाएंगे। 2002 में गुजरात जनसंहार को लेकर मंत्रिमंडल से दिए अपने इस्तीफे की ‘गलति’ को ठीक बारह साल बाद ठीक करेंगे, और जिस शख्स द्वारा ‘राजधर्म’ के निर्वाहन न करने के चलते हजारों निरपराधों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, उसी शख्स को मुल्क की बागडोर सम्भालने के लिए चल रही मुहिम मंे जुट जाएंगे।

मालूम हो कि अपने आप को दलितों के अग्रणी के तौर पर प्रस्तुत करनेवाले नेताओं की कतार में रामबिलास पासवान अकेले नहीं हैं, जिन्होंने भाजपा का हाथ थामने का निर्णय लिया है। Continue reading आओ हम ढोएं हिन्दुत्व की पालकी