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‘विश्व गुरु का सत्य’ और ज्ञान की दूसरी परम्परा : धीरेश सैनी

Guest Post by Dheeresh Saini – Review of ‘Charvak ke Vaaris’

 `चार्वाक के वारिस` को पढ़ते हुए ही मुझे हिंदी के आलोचक और जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर नामवर सिंह के निधन की ख़बर मिली। एक ऐसी किताब को, जो भारतीय समाज-संस्कृति में अतीत से लेकर आज तक ज्ञान-विज्ञान की विभिन्न प्रगतिशील, विवेकवादी, तर्कवादी और विद्रोही धाराओं के प्रति वर्णवादी-ब्राह्मणवादी शक्तियों के हिंसक रवैये की पड़ताल करती हो, पढ़ते हुए विचलित होते चले जाना स्वाभाविक था। Continue reading ‘विश्व गुरु का सत्य’ और ज्ञान की दूसरी परम्परा : धीरेश सैनी