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अल्पसंख्यक अधिकार और राज्य हिंसा

 अगर मैं नहीं जलता

अगर आप नहीं जलते 

हम लोग नहीं जलते

फिर अंधेरे में उजास कौन करेगा
– नाजिम हिकमत

1.
कुछ समय पहले एक अलग ढंग की किताब से मेरा साबिका पड़ा जिसका शीर्षक था ‘रायटर्स पुलिस’ जिसे ब्रुनो फुल्गिनी ने लिखा था। जनाब बुल्गिनी जिन्हें फ्रांसिसी संसद ने पुराने रेकार्ड की निगरानी के लिए रखा था, उसे अपने बोरियत भरे काम में अचानक किसी दिन खजाना हाथ लग गया जब दो सौ साल पुरानी पैरिस पुलिस की फाइलें वह खंगालने लगे। इन फाइलों में अपराधियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा लेखकों एवं कलाकारों की दैनंदिन गतिविधियों का बारीकी से विवरण दिया गया था। जाहिर था कि 18 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में महान लेखकों पर राजा की बारीकी निगरानी थी।

जाहिर है कि अन्दर से चरमरा रही हुकूमत की आन्तरिक सुरक्षा की हिफाजत में लगे लोगों को यह साफ पता था कि ये सभी अग्रणी कलमकार भले ही कहानियां लिख रहे हों, मगर कुलीनों एवं अभिजातों के जीवन के पाखण्ड पर उनका फोकस और आम लोगों के जीवनयापन के मसलों को लेकर उनके सरोकार मुल्क के अन्दर जारी उथलपुथल को तेज कर रहे हैं। उन्हें पता था कि उनकी यह रचनाएं एक तरह से बदलाव के लिए उत्प्रेरक का काम कर रही हैं। इतिहास इस बात का गवाह है कि कानून एवं सुरक्षा के रखवालों द्वारा विचारों के मुक्त प्रवाह पर बन्दिशें लगाने के लिए की जा रही वे तमाम कोशिशें बेकार साबित हुई और किस तरह सामने आयी फ्रांसिसी क्रान्ति दुनिया के विचारशील, इन्साफपसन्द लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन कर सामने आयी।

या आप ‘अंकल टॉम्स केबिन’ या ‘लाईफ अमंग द लोली’ नामक गुलामी की प्रथा के खिलाफ अमेरिकी लेखिका हैरिएट बीचर स्टोव द्वारा लिखे गए उपन्यास को देखें। इसवी 1852 में प्रकाशित इस उपन्यास के बारे में कहा जाता है कि उसने अमेरिका के ‘‘गृहयुद्ध की जमीन तैयार की’। इस किताब की लोकप्रियता का अन्दाज इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 19 वीं सदी का वह सबसे अधिक बिकनेवाला उपन्यास था। कहा जाता है कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन, जिन्होंने गुलामी की प्रथा की समाप्ति के लिए चले गृहयुद्ध की अगुआई की, जब 1862 में पहली दफा हैरिएट बीचर स्टोव से मिले तो उन्होंने चकित होकर पूछा ‘‘ तो आप ही वह महिला जिन्होंने लिखे किताब ने इस महान युद्ध की नींव रखी।’ Continue reading अल्पसंख्यक अधिकार और राज्य हिंसा