रोहित वेमुला की खुदकुशी पर बात करने के लिए भावुकतावाद से बाहर निकल आने की जरूरत है. क्योंकि यह खुदकुशी एक क्रूर, ठंडी, असंवेदनशीलता की वजह से ही हुई है जो किसी भी तरह की मानवीय भावुकता को रौंद डालती है.
हम रोहित के अंतिम पत्र की काव्यात्मक भाषा की बात न करें, न यह कहें कि वह अपनी दलित पहचान के दायरे से निकल कर एक कहीं बड़ी पहचान खुद बनाना चाहता था. उस पत्र का विश्लेषण करने की जगह, बेहतर हो कि हम इस खुदकुशी पर शासक वर्ग की प्रतिक्रिया का विश्लेषण करें. यह जानने के लिए कि हमारा सामना किस यथार्थ से है.
विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे के लिंक को देखें http://hindi.catchnews.com/india/we-should-come-out-of-sentimentalism-to-talk-on-rohit-issue-1453295543.html
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There must be some problem at your end, dkrathod54, because I just opened it and it did open.
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