धार्मिक उत्सवों के नाम पर बढ़ते शोर और अराजकता के ख़िलाफ़ पुणे में उठी नागरिकों की आवाज़

धार्मिक उत्सवों के नाम पर बढ़ते शोरगुल, सड़कों पर अतिक्रमण और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ पुणे में आवाज़ उठी है. विद्यानंद बापट के सवालों ने हज़ारों लोगों को आंदोलित किया. सोलापुर में नागरिकों, डॉक्टरों और छात्रों की मुहिम के बाद गणेशोत्सव को डीजे मुक्त किया गया है. क्या पुणे भी यह पहल करेगा?

सार्वजनिक गणेशोत्सव का आगाज हुए 130 साल गुजर गए!

औपनिवेशिक हिंदुस्तान में लोकमान्य तिलक की अगुआई में शुरू हुए इस उत्सव के पीछे लोगों को साथ लाने का उनका मकसद रहा हो, लेकिन अब जबकि मुल्क आजाद हुए अस्सी साल बीतने को है, तब उसका बदलता स्वरूप रफता-रफता सरोकार सम्पन्न नागरिकों के बीच बेचैनी, चिंता का विषय बनता जा रहा है.

टुकड़ों-टुकड़ों में आती खबरों से भले ही पूरी तस्वीर न बनती हो, लेकिन डीजे और डॉल्बी साउंड के जरिए होता प्रचंड शोरगुल, रात रात भर चलने वाला संगीत, लोगों को बुनियादी जनतांत्रिक अधिकारों के सरासर उल्लंघन करने की छूट, सड़कों को घेरकर गैर-कानूनी ढंग से बनाए जाते पंडाल और निकाले जाते जुलूस- जिसमें उन्मादी समूहों द्वारा कभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ अनर्गल नारे भी लगाए जाते हैं- और धार्मिकता की आड़ में एकत्रित पैसा, जिसका कोई हिसाब किताब भी नहीं होता- इसे अब शहरों, कस्बों की नियति मानने की मानसिकता बलवती होती जा रही है.

गौरतलब है कि इस स्थिति को आप पूरे मुल्क के फ़लक पर देख सकते हैं, फिर वह रामनवमी या दुर्गापूजा जैसे अवसर हों या कांवड़ यात्रा जैसा आयोजन हो! तय बात है कि विगत एक दहाई से अधिक समय से जबसे मुल्क की बागडोर धर्म विशेष को वरीयता देने की हिमायती ताकतों के हाथ में आई है, तब से ऐसे सभी उत्सवों पर सरकार की भी काफी नज़र ए इनायत बरसती दिखती है.

क्या धार्मिक उत्सव नागरिक अधिकारों के हनन का जरिया बन जा रहे हैं?

दिलचस्प बात है कि इस स्थिति को लेकर खुद जनता के अंदर कितना आक्रोश भरा पड़ा है, (भले ही अभी देशव्यापी नहीं हुआ है), और किस तरह वह खुद भी आवाज बुलंद करने के लिए तैयार है, इसका खुलासा पिछले दिनों अचानक विस्फोट की तरह ही हुआ. जिस पुणे शहर ने इस गणेशोत्सव को सार्वजनिक स्तर पर मनाने का आगाज किया, वही शहर सार्वजनिक उत्सवों के सार्वजनिक उपद्रव में होते रूपांतरण के खिलाफ हजारों की तादाद में सड़कों पर उतरा. [ Read the full article here : https://thewirehindi.com/337543/punes-fight-against-noise-at-religious-festivals/]

We look forward to your comments. Comments are subject to moderation as per our comments policy. They may take some time to appear.