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भगत सिंह और गांधी

क्या भगत सिंह और गांधी पर एक साथ बात की जा सकती है? परस्पर विरोधी विचारों और व्यक्तित्वों का ऐसा युग्म शायद ही मिले.एक को हिंसा का पक्षधर और दूसरे को हिंसा का घोर विरोधी माना जाता है.एक की छवि चिरयुवा की है,दूसरे की एक स्थिर वार्धक्य की. एक अधैर्य का प्रतीक माना जाता है,दूसरा धीरज की प्रतिमूर्ति.एक समाजवादी क्रान्ति का पैरोकार है तो दूसरा सह्य पूंजीवाद का वकील ठहराया गया है जिसके लिए उसने ट्रस्टीशिप की खूबसूरत आड़ ली.

असमानताएं यहीं खत्म नहीं होतीं.भगत सिंह ने औपचारिक शिक्षा न के बराबर ली, हालाँकि वे भयंकर अध्ययनशील थे,गांधी ने एक भले इंसान की तरह पूरी पढ़ाई की और फिर एक पेशेवर वकील की ज़िन्दगी बसर करने की कोशिश की. भगत सिंह अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण बचपन से ही ब्रिटिश साम्राज्य के घोर विरोधी थे.गांधी के जीवन के आरंभिक वर्ष ब्रिटिश साम्राज्य के वफादार के थे और वे उसकी बुनियादी अच्छाइयों में यकीन करते थे.भगत सिंह का ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ होना ही स्वाभाविक और तर्कसंगत था, गांधी कई संयोगों और दुर्घटनाओं के रास्ते इस नतीजे पर पहुंचे. Continue reading भगत सिंह और गांधी