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लो मैं उठी: माया एंजलो/अनुवाद: निवेदिता मेनन

MAYA ANGELOU recites her iconic poem Still I Rise, followed by the translation into Hindustani by NIVEDITA MENON below.

 

चाहे लिख दो मेरी कहानी,

झूठी, विकृत, कडवी सी,

चाहे कुचल दो  मिट्टी में,

उड़ जाऊंगी, मैं धूल सी.

 

मेरी गुस्ताखी से हो नाराज़?

क्या इतना दुःख है दिल में?

मेरी चाल का यह गुरूर,

मानो तेल के कुँए बैठक में.

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