क्या विश्व पुस्तक मेला बड़े प्रकाशकों और हिन्दू धार्मिक जमातों को सुपुर्द किया जा रहा है ?

अगले मेले में स्टॉल लगाने का शुल्क और बढ़ा , हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओँ की स्टॉल की संख्या और घटेगी

( Photo courtesy : https://vikalpvimarsh.in/)

..दिल्ली से लेकर किसी भी शहर में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित होने वाले मेलों में चमक-दमक बढ़ रही है, प्रधानमंत्री के कटआउट के साथ सेल्फी पाॅईंट्स की तादाद भी बढ़ रही है, प्रवेश मुफत करने के चलते मेले में पहुंचनेवालों की तादाद भी बढ़ रही है। मगर बारीकी से गौर करें तो पाएंगे कि मेले का स्वरूप रफ्ता-रफ्ता बदला जा रहा है।

यह अकारण नहीं कि ‘प्रकाशन में एकाधिकार की नीतियां वापस लेने’ तथा ‘पठन-पाठन की संस्कृति और विविधता पर हमलों’ पर चिंतित सरोकार संपन्न लेखक, पत्रकार, रचनाकार और प्रबुद्ध पाठक ही नहीं, मेले में नियमित पहुंचनेवाले भी पुस्तक मेले के इस बदलते स्वरूप से चिंतित हैं और उनका आकलन है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो यह ‘समाप्त हो जाएगा’।.. ( Read the complete article here :http://epaper.navjivanindia.com//imageview_4233_112614409_4_71_04-10-2026_i_1_sf.html)

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