Tag Archives: Gauri Lankesh

Joint Statement Condemning Arrest of Activists and Public Intellectuals

Following is the final statement with the signatures as they were when it was closed for purposes of releasing to the media and sent to us by the initiators of the campaign.

We, the undersigned, are shocked by the serial raids across the country on the homes of activists and public intellectuals who are critical of the government and the ruling party at the Centre. The arrests of prominent activists and intellectuals Sudha Bharadwaj, Vernon Gonsalves, Gautam Navlakha, Varavara Rao, Arun Ferreira and others, are nothing but an attempt by the government to strike terror among those who are fighting for justice for the marginalised. This is also an attempt by the BJP to invent a false enemy and engage in scaremongering in order to polarise the 2019 elections in its favour. Already, the government and the media houses close to the BJP have been trying to spin a false narrative of a Maoist conspiracy since June, 2018. Terms like “urban naxals” are invented in order to stifle any criticism of the government. We have learnt that the Delhi Police, after having arrested Sudha Bharadwaj, waited for Republic TV to arrive before taking her to the court. This simply shows that the arrests are incomplete without the accompanying sensationalist media propaganda to demonise activists, human rights defenders and intellectuals.

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Sad at Killing of My Ambedkarite Elder Sister Gauri Lankesh, says Chandrashekhar of Bhim Army, as Govt Moves to Slap NSA on BA Activists

This is an amazing moment. From what we at the Committee for the Defense of Bhim Army have gathered, and from Chandrashekhar’s own letter from Saharanpur District Jail (see below), the administration is moving to slap charges under the National Security Act on Chandrashekhar and other activists. However, while expressing his resolve to fight on, Chandrashekhar also makes it clear in this letter (the facsimile and the text below) that he is equally concerned and saddened at the killing of Gauri Lankesh. He refers to her as his ‘Ambedkarite elder sister’ and pledges to carry forward the struggle to get her justice as well. This is how different dots in the struggle get connected. This is how new nodes of thinking and doing politics emerge. Right now, for us however, the struggle, for the legal defense of Chandrashekhar and other Bhim Army activists is paramount. They want to crush the movement in its infancy and we must ensure it can grow and carry on its struggle for liberation from the yoke of Hinduism and Hindutva.
It is worth placing on record here that when the formation of the Committtee for the Defense of Bhim Army was announced, Gauri had got it touch and expressed her wish to be on the Committee. Unfortunately, that was not to be. But we are sure that this is perhaps the best tribute we can offer to Gauri – carry on the fight for the defense of Bhim Army!
Chandrashekhar’s letter from jail
सभी साथियों व माताओं बहनों को जय भीम जय भारत, जय भीम आर्मी,
 एक आवश्यक बात आप सब से शेयर करनी है उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की जेल इस समय मेरा घर है. एक सूचना आई थी की काले अंग्रेजों की तानाशाह सरकार और उनके हाथ की कठपुतली बना जिला प्रशासन यह चाहता है कि मैं अपनी जमानत अर्जी ना डालू अगर मैं जमानत की अर्जी डलवाता हूं तो वो मेरे ऊपर रासुका लगा देंगे.
पहली बात तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि यह देश हमारा है इस देश के 85 % दलित पिछड़े मुस्लिम वह अल्पसंख्या लोग अपने ही देश में गुलाम अब नहीं रहेंगे हम इस देश के Rakshak भी है और शासक भी है 85 % लोग यहां के मूल निवासी है और दलितों का रक्षक दल चमार जाति की चमार रेजिमेंट इनका उदाहरण है हमने इस देश के लिए बलिदान दिया है काले अंग्रेज जो दलित विदेशी होने का दावा करते हैं वह भीम आर्मी के प्रभाव से डरकर मुझ पर रासुका लगाकर मुझे डराना चाहते हैं तो मैं उन्हें यह कहना चाहता हूं कि रासुका ही नहीं वह चाहे तो मुझे फांसी लगा दे तो भी वह मुझे झुका नहीं सकते.
मैं एक बार नहीं एक हजार बार भी अपनी कौम के लिए हंसते हंसते फांसी चढ़ना पसन्द करुगा और मान-सम्मान वे इस देश में अधिकारों की जो लड़ाई है उसे पीछे नहीं हटूंगा. आजाद न तो कभी झुका है और ना कभी झुक  कर कोई समझौता करेगा मुझे गर्व है कि मैं चमार जाति में पैदा हुआ जब तक लहू का आखरी करता रहेगा अपने लोगों की सुरक्षा अधिकार वह मान सम्मान के लिए संघर्ष जारी रहेगा ।।
अंबेडकरवादी बड़ी  बहन गौरी लंकेश की हत्या से दुखी हूं पर इनके जज्बे को सलाम उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी हम सब उनको न्याय दिलाकर रहेंगे वो कभी झुकी नहीं इसलिए बड़ी खुशी से आपको यह कहना चाहता हूं कि अगर कल मैं ना भी रहूं तो पीछे न हटना संघर्ष करना आपके संघर्ष से हमारे आने वाली पीढ़ियां इस देश की शासक होगी बाबा साहब ने कहा जीवन लंबा नहीं महान होना चाहिए गुलामी और सम्मान का एक दिन बड़ा होता है उन हजारों साल से ना झुका हु  ना झुका गा ना रुका हु ना रुकू गा और ना बिका हु ना बिकुगा आजाद जिया था आजाद मरूँगा  जय भीम नीला सलाम जय साहब कांशीराम ।
       आपका भाई बेटा दोस्त
*(एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद रावण संस्थापक भीम आर्मी भारत मिशन)*

पाकिस्तान का वर्तमान अब भारत का भविष्य नज़र आने लगा है

शब्द और विचार हर किस्म के कठमुल्लों को बहुत डराते हैं. विचारों से आतंकित लोगों ने अब शब्दों और विचारों के ख़िलाफ़ बंदूक उठा ली है.

New Delhi: Demonstrators hold placards with the picture of journalist Gauri Lankesh during a 'Not In My Name' protest at Jantar Mantar in New Delhi on Thursday. PTI Photo(PTI9_7_2017_000157B)

Gauri, you are more than a memory

You are a direction

For a world that should not be!

– K P Sasi

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कुछ लोग जीते जी किवदंती बन जाते हैं. कन्नड़ भाषा के अग्रणी हस्ताक्षर पी लंकेश (जन्म 8 मार्च, 1935) ऐसे ही शख़्सियतों में शुमार किए जा सकते हैं. समाजवादी आंदोलन से ताउम्र सम्बद्ध रहे लंकेश, जो कुछ समय तक अंग्रेज़ी के प्रोफेसर भी रहे.

आज भी उनकी अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘लंकेश पत्रिके’ के लिए याद किए जाते हैं, जो उत्पीड़ितों, दलितों, स्त्रियों और समाज में हाशिये के तबकों का एक मंच बनी थी, जिसने कन्नड़ भाषा में आज सक्रिय कई नाम जोड़े, जो उसूल के तहत विज्ञापन नहीं लेती थी और एक समय था जब उसकी खपत हज़ारों में थी और उसके पाठकों की संख्या लाखों में.

लंकेश के बारे में मालूम है कि 25 जनवरी, 2000 को अपने साप्ताहिक का संपादकीय लिख कर सोने चले गए तो फिर जगे ही नहीं. कर्नाटक का समूचा विचारजगत स्तब्ध था. इसे विचित्र संयोग कहा जाना चाहिए कि दिल का दौरा पड़ने से हुई उनकी मौत के सत्रह साल आठ महीने और दस दिन बाद महज कर्नाटक ही नहीं, पूरे देश का विचारजगत स्तब्ध है, जब उनकी बड़ी बेटी गौरी लंकेश की मौत की ख़बर लोगों ने सुनी है, जो हत्यारों की गोलियों का शिकार हुईं.

( Read the full text of the article here : http://thewirehindi.com/18088/gauri-lankesh-murder-fundamentalist-dissent/)