Guest post by ARUN FERREIRA
Translated from English by Anil Mishra
नागपुर जेल की उच्च–सुरक्षित परिसीमा में स्थित अंडा बैरक बग़ैर खिड़कियों वाली कोठरियों का एक समूह है। अंडा के प्रवेश–द्वार से दूसरी अधिकतर अन्य कोठरियों में जाने के लिए लोहे के पाँच दरवाज़ों, [और पैदल] एक संकरा गलियारा पार करना होता है। अंडा के भीतर कई अलग अहाते हैं। हरेक अहाते में कुछ कोठरियाँ हैं, और हर पहली कोठरी दूसरी से सावधानीपूर्वक अलगाई गई है। कोठरियों में बहुत कम रोशनी होती है और आप यहाँ कोई पेड़ नहीं देख सकते। आप यहाँ से आसमान तक नहीं देख सकते हैं। मुख्य निगरानी टॉवर के ठीक ऊपर से अहाते में एक बड़ा भारी, ठोस अंडा हवा में लटकता रहता है। लेकिन इसमें (और अन्य अडों में) एक बड़ा फ़र्क़ है। इसे तोड़कर खोलना असंभव है। बल्कि, यह क़ैदियों (के हौसलों) को तोड़ने के लिए बनाया गया है।
अंडा वो जगह है जहाँ सबसे ज़्यादा बेलगाम क़ैदियों को, अनुशासनात्मक क़ायदों के उल्लंघन करने की सज़ा के लिए क़ैद किया जाता है। नागपुर जेल के अन्य हिस्से इतने ज़्यादा सख़्त नहीं है। अधिकतर क़ैदी पंखे और टीवी वाली बैरकों में रखे जाते हैं। बैरकों में, दिन के पहर काफ़ी इत्मिनान वाले, यहाँ तक कि आरामतलब भी हो सकते हैं। लेकिन अंडा में, कोठरी के दरवाज़े ही हवा के आने जाने का एकमात्र ज़रिया है, और ये भी कुछ ख़ास आरामदायक नहीं, क्योंकि ये किसी खुले प्रांगण में नहीं, एक ढंके–मुंदे गलियारे में खुलता है। Continue reading जेल डायरी: अरुण फेरेरा






