‘आधुनिक भारत के निर्माता: डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार’ के बहाने चन्द बातें

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठन भाजपा के केन्द्र में तथा कई राज्यों में सत्तारोहण के बाद शिक्षा जगत उनके खास निशाने पर रहा है। विभिन्न अकादमिक संस्थानों में अपने विचारों के अनुकूल लोगों की महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करने से लेकर, स्वतंत्रामना अकादमिशियनों पर नकेल डालने के प्रयासों से लेकर, पाठयक्रमों में बदलावों तक इसे कई तरीकों से अंजाम दिया जा रहा है। पिछले दिनों केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्राी सुश्री इराणी ने संघ से सम्बधित शैक्षिक संगठनोें से प्रस्तावित नयी शिक्षा नीति के मसविदे के बारे में बात की, जिसका प्रारूप नवम्बर में रखे जाने की योजना है। इसके अलावा विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों में खाली हुए या होने वाले पदों पर नियुक्तियों के मसलों पर भी बात हुई।
सूबा राजस्थान – जो केन्द्र में सत्तासीन भाजपा सरकार की कई नीतियों के लिए एक किस्म की प्रयोगशाला की तरह काम करता रहा है, फिर चाहे श्रमिक कानूनों में बदलावों का मामला हो, पंचायतों के चुनावों में खड़े रहने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तय करने का मामला हो – एक तरह से शिक्षा जगत में आसन्न बदलावों के मामले में भी एक किस्म की ‘मिसाल’ कायम करता दिख रहा है। स्कूलों के रैशनलायजेशन/ यौक्तिकीकरण के नाम पर सतरह हजार सरकारी स्कूलों को आदर्श स्कूल में मिला देने का मामला हो या पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार द्वारा कायम हरिदेव जोशी पत्राकारिता विश्वविद्यालय को बन्द करने का निर्णय हो या राजीव गांधी ट्राइबल युनिवर्सिटी को उदयपुर से डुंगरपुर जिले के बनेश्वर धाम जैसे अधिक दुर्गम इलाके में भेजने का मामला हो, उसने इस दिशा में कई कदम बढ़ाए है। अब अपने ताज़े फैसले में उसने संघ के संस्थापक सदस्य केशव बलिराम हेडगेवार की जीवनी को खरीदने की सिफारिश राज्य के कालेज पुस्तकालयों की है। अपने सर्क्युलर में शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि कालेज के पुस्तकालय अकादमिक राकेश सिन्हा द्वारा लिखित ‘आधुनिक भारत के निर्माता: डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार’ नाम से किताब को पुस्तकालय हेतु मंगवा लें।
प्रस्तुत निर्णय की तीखी प्रतिक्रिया हुई है, राज्य सरकार पर आरोप लगा है कि वह शिक्षा के केसरियाकरण को बढ़ावा दे रही है। प्रस्तुत कदम को ‘देश के युवाओं के मनमस्तिष्क पर हिन्दू राष्ट्र की मानसिकता लादने के तौर पर, सामाजिक विभाजन पैदा करने के े कदम के तौर पर’ देखा जा रहा है। यह भी आरोप लगे हैं कि उसका मकसद है युवाओं के मनों को हिन्दू बनाम गैरहिन्दू के आधार पर बांटना, उपरी तौर पर सांस्क्रतिक और धार्मिक तौर पर बहुवचनी दिखना, मगर एक ऐसे समाज को प्रचारित करना जो हिन्दू समाज व्यवस्था से निर्धारित हो।’ Continue reading हेडगेवार का पथ: मिथक और यथार्थ









