Tag Archives: student protests

17 Faces of Hunger for Justice – Day 6 of the Indefinite Hunger Strike at JNU: ‘We Are JNU’

Guest Post by ‘We Are JNU

At the end of the 6th day of the Indefinite Hunger Strike by JNU Students, the ‘We Are JNU‘ Facebook Page uploaded a gallery of portraits of the 17 students on Hunger Strike, together with details of their medical conditions. We are sharing this post on Kafila in solidarity

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जी हाँ, हम राजनीति करते हैं : अनन्त प्रकाश नारायण

Guest Post by Anant Prakash Narayan

जे.एन.यू. में 9 फरवरी को एक घटना घटी. घटना क्या थी अब उसके बारे में बहुत सी चीजे स्पष्ट हो चुकी है. सरकार का दमन चला जिसके परिणामस्वरुप एक आन्दोलन चला. कहा ये जा रहा है कि आन्दोलन के कारण सरकार बैकफुट पर है. ये आन्दोलन अभी भी चल रहा है. जब ये मुद्दा पुरे देश में गरमाया जा रहा था  उस समय बहुत सारी चीजे डिबेट का हिस्सा बनी जैसे राष्ट्रवाद क्या है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Right to Freedom of Speech and Expression) को कैसे देखा जाये? आज़ादी की सीमा क्या होगी? क्या टैक्स से पढने वाले स्टूडेंट्स को “इतना बोलना” शोभा देता है? क्या जब सीमा पर जवान मर रहे है तो “ये काम” किया जा सकता है? ये सारे मुद्दे बहुत ही जोर–शोर से सरकार के पक्ष से या फिर इसके उलट लोकतंत्र के पक्ष में बात रखने वालों की तरफ से भी की जा रही थी. लेकिन इसी बीच में एक खतरनाक अवधारणा सरकार के तरफ से बात रखने वाले और जाने अनजाने लोकतंत्र की तरफ से भी बात रखने वाले टी.वी. चैनलो, अखबारों, इंटेलेक्चुअल, राजनीतिज्ञों की तरफ से रखी जा रही थी. वो अवधारणा थी कि राजनीति बहुत बुरी चीज है और छात्र राजनीति तो बदतर. यहाँ तक कि हमारी पैरोकारी करने वाला पक्ष भी यह बार-बार साबित करने का प्रयास कर रहा था कि ये सामान्य से पढने लिखने वाले छात्र है इनका राजनीति से कोई मतलब नही है. ये लोग तो बस कभी कभी कुछ यू हीं करते रहते हैं. क्या अगर हमारे बारे में यह टैग लग जाता कि हम राजनीति करने वाले लोग है तो हमारे पक्ष से बात रखना इतना मुश्किल हो जाता. जबकि यह सर्वविदित है कि जिन कुछ छात्रो के नाम राजद्रोह के तहत लिए जा रहे है वे वामपंथ की सक्रिय राजनीति का हिस्सा है. आने वाले समय में हम आन्दोलन को किस हद तक जीतते है और आगे ले जा करके इसको इस फासिस्ट सरकार के लिए कितना खतरनाक बना पाते है ये अभी तय होना बाकी है लेकिन “मुख्याधारा” की राजनीति करने वाली पार्टियाँ, जिसको प्रोग्रेसिव छात्र-आन्दोलन ने हमेशा उनके जन –विरोधी रवैये के कारण चैलेंज दिया है, एक बार इस मौके को राजनीति, खासतौर से अगर छात्र करे तो, बहुत ही गलत चीज है इसको स्थापित करने में लगी हैं. छात्रों का काम काज सिर्फ पढना-लिखना है और इसके इतर वो अगर कोई और काम करते है तो वो अपनी “सीमा” लांघते है. बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में छोटे-छोटे उम्र के कमाने वाले लोगों के साथ तुलना करके ये समझाने की कोशिश की गई कि आप जितनी कम उम्र में जितना ज्यादा कमा लेते है आप उतने ही सफल स्टूडेंट है. हम अभी लगभग बीस दिन के एक कैंपेन में थे. इस कैंपेन के तहत देश के विभिन्न हिस्सों खास तौर से उत्तर भारत के गाँवो और छोटे-छोटे कस्बो और कुछ शहरो में मेरा जाना हुआ. जिसमे जे. एन. यू. पर बात होती, भगत सिंह और डॉ. अम्बेडकर के विज़न पर बात होती. जब इन विषयों पर बात होती तो नैचुरली मोदी सरकार के ऊपर बात होती. उन कार्यक्रमों में कुछ ऐसे लोग भी मिलते जिनका कहना होता कि आप लोगों के साथ जो हुआ गलत हुआ लेकिन इस मैटर को लेकर अब आप लोग राजनीति कर रहे है. मोदी के खिलाफ आप लोग जो इतना बोल रहे है उससे अब आप लोग एक्सपोज हो गये है कि आप लोग राजनीति कर रहे है. क्या सच में राजनीति इतनी बुरी चीज है कि उससे स्टूडेंट्स को दूर रहना चाहिए? Continue reading जी हाँ, हम राजनीति करते हैं : अनन्त प्रकाश नारायण

Am I Doing Enough? Crisis, Activism and the Search for Meaning: Lata Mani

This is a guest post by LATA MANI

In the past fifteen years I have been developing what I describe as “contemplative cultural critique.” Such an effort at transcoding between secular and meditative understandings is not without difficulty and not without its limits. But it has led me to pose questions I might not otherwise have asked, and to think through them in ways that I would not have previously considered.

How might this approach contribute to reflecting on the political turmoil of the past eight weeks in India? This period has been marked by national focus on the penalization and criminalization of student dissent at Hyderabad Central University and Jawaharlal Nehru University. In the former case prolonged institutional harassment drove Rohith Vemula to take his life and in the latter it has led to the imprisonment of Kanhaiya Kumar, Umar Khalid and Anirbhan Bhattacharya on charges of sedition. In both instances a witch-hunt led by the media and the right-wing BJP government has created a hostile environment conducive neither to dialogue nor to a calm consideration of facts. These events, as P. Sainath has argued, extend to university campuses ideological, legal and political tactics long used against communities resisting “development” in rural India.[1] Continue reading Am I Doing Enough? Crisis, Activism and the Search for Meaning: Lata Mani

स्मृति ईरानी को एक जे-एन-यू के छात्र की चिट्ठि: अनन्त प्रकाश नारायण

Guest Post by Anant Prakash Narayan

सेवा में,

श्रीमती स्मृति ईरानी जी

“राष्ट्रभक्त” मानव संसाधन विकास मंत्री,

भारत सरकार

संसद में दिए गए आपके भाषण को सुना. इससे पहले की मै अपनी बात रखूँ , यह स्पष्ट कर दूं की यह पत्र किसी “बच्चे” का किसी “ममतामयी” मंत्री के नाम नहीं है बल्कि यह पत्र एक खास विचारधारा की राजनीति करने वाले व्यक्ति का पत्र दूसरे राजनैतिक व्यक्ति को है. सबसे पहले मै यह स्पष्ट कर दूं कि मै किसी भी व्यक्ति की योग्यता का आकलन उसकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नहीं करता हूँ बल्कि साफ़ साफ़ कहूं तो मै “योग्यता”(मेरिट) के पूरे कांसेप्ट को खारिज करता हूँ.

मानव संसाधन मंत्रालय का पद भार लेने के साथ ही यह अपेक्षा की जाती है कि आप इस देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में उनकी ऑटोनोमी का सम्मान करते हुए उसके लिए उत्तरदायी होंगी. रोहित वेमुला के मामले में आपने क्या किया यह सबके सामने है कि किस तरह से वहाँ के प्रशासन पर आपने दबाव डाला जिसका नतीजा रोहित के institutional मर्डर के रूप में हमारे सामने आया. लेकिन मै इन सारी चीजो पर अभी बात नही करना चाहता. आप बार बार अपनी औरत होने की पहचान (आइडेंटिटी) को assert करतीं हैं और इसको करना भी चाहिए क्यूंकि नारी जाति उन ढेर सारे हाशिये पर किए गए लोगों में एक है जिनको सदियों से शोषित किया गया है. मै आपसे यह पूछना चाहता हूँ कि एक दलित स्त्री जो कि हर तकलीफ उठाते हुए अकेले अपने दम पर जब अपने बेटे बेटियों को इस समाज में एक सम्मानपूर्ण जगह देने के लिए संघर्ष कर रही थी तब एक नारी होने के कारण आप की क्या जिम्मेदारी बनती थी ? क्या आपको उस महिला के जज्बे को सलाम करते हुए उसकी बहादुरी के आगे सर झुकाते हुए उसके साथ नहीं खड़ा होना चाहिए था? हाँ, मै रोहित की माँ के बारे में बात कर रहा हूँ. जो महिला इस ब्रहामणवादी व पितृसत्तात्मक समाज से लड़ी जा रही थी, अपने बच्चों को अपने पहचान से जोड़ रही थी, उस महिला को आप व आपकी सरकार उसके पति की पहचान से क्यूँ जोड़ रहे थे? आपको भी अच्छा लगता होगा की आपकी अपनी एक स्वतंत्र पहचान है. लेकिन यह अधिकार आप उस महिला से क्यूँ छीन  रहीं थीं? क्या आप भी पितृसत्तात्मक व ब्रहामणवादी समाज के पक्ष में खड़ी होती हैं? अपना पूरा नाम बताते हुए अपनी जाति के बारे में आपने सवाल पूछा और आपका भाषण खत्म होने के पहले ही लोगों ने आपकी जाति निकाल दी. मै आपकी जाति के बारे में कोई दिलचस्पी नहीं रखता हूँ और मै यह बिलकुल नहीं मानता हूँ की अगर आप उच्च जाति के होते हैं तो आप जातिवादी ही होंगे लेकिन आपके विभाग/मंत्रालय के तरफ से जो चिट्ठियाँ लिखी गई उसमे रोहित और उसके साथियों को जातिवादी /caste-ist बताया. मैडम क्या आप caste-ism और  caste assertion का अन्तर समझती हैं? मै समझता हूँ की आप ये अन्तर भली – भाँति समझती हैं क्यूंकि आर एस एस जो आपकी सरकार और मंत्रालय को चलाता है, वह वर्ण व्यवस्था के नाम पर जाति व्यस्वस्था को भारतीय समाज की आत्मा समझता है और आर-एस-एस के एजेंडे को लागू करवाने की राजनैतिक दृढ़ता हमने समय समय पर आप में देखी हैं.

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Statement by Educators, Intellectuals, Artists and Writers on Police Action in JNU

We, the undersigned, (educators, professors, intellectuals, writers and artists), are shocked by the appalling conduct of Delhi Police at Jawaharlal Nehru University in New Delhi yesterday. We also condemn the irresponsible sloganeering by some people at the fringes of a gathering on the JNU campus to mark the third anniversary of the execution of Afzal Guru. We believe that such calls to ‘war, until the destruction of India’ erode the gravity of any serious discussion on any political question, be it capital punishment, human rights or even the question of self-determination. Such conduct is shameful, regardless of who does it, and deserving of the sharpest criticism.

That said, the only way to counter such incidents, when they occur, is through a deepening of dialogue, not through police action. The police has no business to enter places of learning and harass students (including students who were clearly trying to defuse the situation and to take a stand against the irresponsible elements who gave the objectionable slogans) when there had been no breach of peace.

We condemn the arrest of Kanhaiyya Kumar, president of the Jawaharlal Nehru University Students Union on trumped up charges of sedition and demand that he be released immediately. Kanhaiyya’s public statements, which are widely available, clearly show that sedition is the last thing that you can charge him with. The University Authorities must take steps to ensure that the witch hunt that is ensuing against other students must also cease immediately. We demand that there be no more arrests of students. We are saddened by the new JNU Vice Chancellor’s readiness to submit to the diktats of the police, and we condemn the totally outrageous statements by the Union Home Minister Rajnath Singh, and the Minister for Human Resources Development Smriti Irani which virtually declare war on universities as spaces for dissent and debate.

We demand an unconditional withdrawal of police personnel from campuses, and reiterate our support and solidarity with the students, faculty and staff of JNU, and with students everywhere in India who are pursuing a courageous resistance against the ongoing assault on higher education unleashed by the BJP government.

Aditya Nigam, Professor, Centre for the Study of Developing Societies, Delhi

Ashis Nandy, Distinguished Fellow, Centre for the Study of Developing Societies, Delhi

Bharti Kher, Artist, Delhi

Debjani Sengupta, Associate Professor, Department of English, Indraprastha College, Delhi University

Gauri Gill, Artist, Delhi

Gayatri Sinha, Curator, Delhi

Geeta Kapur, Curator, Delhi

Iram Ghufran, Filmmaker, Delhi

Jeet Thayil, Poet, Delhi

K. Satchidanandan, Poet, Delhi

Karen Gabriel, Department of English, St. Stephen’s College, Delhi University

Lawrence Liang, Alternative Law Forum, Bangaluru

Moinak Biswas, Professor, Department of Film Studies, Jadavpur University, Kolkata

Nancy Adajania, Curator, Mumbai

Nandini Datta, Associate Professor, Miranda House, Delhi University

Neha Choksi, Artist, Mumbai

Nivedita Menon, Professor, Centre for Comparative Politics & Political Theory, School of International Studies, Jawaharlal Nehru University, Delhi

P.K.Vijayan, Department of English, St. Stephen’s College, Delhi University

Pallavi Paul, Artist/Filmmaker, Delhi

Parnal Chirmuley, Associate Professor, Centre of German Studies, School of Language, Literature and Culture Studies, Jawaharlal Nehru University, Delhi

Pratiksha Baxi, Associate Professor, Centre for the Study of Law and Governance, Jawaharlal Nehru University, Delhi

Rajarshi Dasgupta, Assistant Professor, Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Delhi

Rajeev Bhargava, Professor, Centre for the Study of Developing Societies, Delhi

Ravi Sundaram, Professor, Centre for the Study of Developing Societies, Delhi

Ravi Vasudevan, Professor, Centre for the Study of Developing Societies, Delhi

Romila Thapar, Historian, Emeritus Professor, Jawharalal Nehru University

S. Kalidas, Critic, Delhi / Goa

Sahej Rehal, Artist, Mumbai

Sabina Kidwai, Associate Professor, AJ Kidwai Mass Communication Research Centre, Jamia Millia Islamia, Delhi

Sabeena Gadihoke, Associate Professor, AJ Kidwai Mass Communication Research Centre, Jamia Millia Islamia, Delhi

Sanjay Kak, Filmmaker, Delhi

Sarnath Banerjee, Artist, Delhi / Berlin

Saumyajit Bhattacharya, Associate Professor, Department of Economics, Kirori Mal College, University of Delhi

Sibaji Bandyopadhyay, Fellow, Centre for the Studies of Social Sciences, Kolkata

Shohini Ghosh, Professor, AJ Kidwai Mass Communication Research Centre, Jamia Millia Islamia, Delhi

Shuddhabrata Sengupta, Artist, Raqs Media Collective, Delhi

Subodh Gupta, Artist, Delhi

Sumit Sarkar, Historian, Formerly Professor, Department of History, Delhi University

Tanika Sarkar, Historian, Formerly Professor, Centre for Historical Studies, Jawaharlal Nehru University, Delhi

Vivan Sundaram, Artist, Delhi

 

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Restore Normalcy in JNU, Release All Detained Students, Delhi Police Quit JNU

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Students, Professors and Staff of JNU Stand Together in Protest on February 12, 2016 against the Police Action on Campus and the Assault on JNU by ABVP-BJP

In an unprecedented and draconian move, Delhi Police personnel entered the precincts of Jawaharlal Nehru University in Delhi yesterday afternoon, and began a search operation based on malicious complaints against ‘unnamed persons’ filed by a Delhi BJP leader in response to an event titled – ‘Country Without a Post Office’ – organized by some students to commemorate and protest against the execution of Afzal Guru on February 9th.

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Delhi Police Tells Lies about Attacks on Protesting Students – #OccupyUGC

[ Video Footage, courtesy Akhil Kumar, taken from his Facebook Page ]

The ongoing movement to #OccupyUGC by students from all the universities in Delhi has so far seen two instances of vicious attack by the Delhi Police. Students were manhandled, abused and badly beaten with sticks and batons. Several had to be hospitalized and some are severely injured. However, police officers have been lying about their actions.

The Indian Express reported the lathi charge and also quoted a senior police officer – DCP (Central), Paramaditya as saying, “Around 45-50 protesters were detained. No one was lathicharged. Policemen did not have lathis… the protesters attacked and injured policewomen.”

 

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Here is a series of videos shot by Akhil Kumar, a young independent photo-journalist (who was himself severely beaten after this). This footage clearly shows up DCP (Central) Paramaditya as a liar.

Meanwhile, #OccupyUGC continues.