Guest post by NIYATI SHARMA
लोकसभा में स्मृति ईरानी जी की सफाई उर्फ़ भाषण बहुत भावुक, मनोरंजक और प्रभावशाली था। लोग उन्हें ‘आयरन लेडी’ का खिताब दे रहे हैं- यह उनके तर्क के लिए या उनके तेवर के लिए, या फिर उनके यह कहने के लिए की वो अपना सर काट के मायावती जी के चरणों में रख देंगी, पता लगाना थोड़ा मुश्किल है । सोचा था स्मृति जी कुछ सवालों का जवाब देंगी पर असल में मिली एक लम्बी, मेलोड्रामाटिक सफाई जिससे उन्होंने अपनी सरकार की सारी गलतियों पे पर्दा डाल दिया।ऐसी स्तिथि में हम मजबूर हो गए हैं की स्मृति जी से जो सवाल पूछे जाएँ वो तथ्य-सम्बंधित होने के साथ साथ अति भावनात्मक भी हों।
स्मृति जी के अभिनय के सारे सालों का अनुभव उनके भाषण में साफ़ दिखाए दिया। लोकसभा में स्मृति जी के हाव भाव से आक्रोश टपक रहा था पर क्या उन्हें इतना क्रोधित होने का हक़ है? स्मृति जी का यह मानना है की उनके ऊपर काफी बेबुनियादी आरोप लगे हैं, पर यह मामला स्मृति ईरानी जी के बारे में नहीं है, यह मामला उन मासूम छात्रों के बारे में है जिनकी ज़िन्दगी को उन्होंने दांव पर लगा दिया है। आखिर उन ‘बच्चों’ का क्या जिनके ऊपर उन्होंने और उनकी सरकार ने पिछले कुछ दिनों में अनगिनत आरोप लगाये हैं? स्मृति ईरानी जी तो मंत्री हैं, अगर आरोप लगे भी, तो उनकी ज़िन्दगी बर्बाद नहीं होगी, पर जिस क्रूरता से सरकार और मीडिया ने छात्रों का चरित्र-हनन किया, वह कभी भी इससे उभर नहीं पाएंगे। कन्हैया, उमर और अनिर्बान न ही मंत्री हैं जिनके पास कोई राजनैतिक सहारा है और न ही उनके परिवार इतने धनी हैं की वह अपना जीवन, अपनी इज़्ज़त पुननिर्मित कर पाएं। स्मृति जी, आप तो सिर्फ अपने बारे में सोच रही थीं की आप पर और आपकी परफॉरमेंस पर क्या क्या सवाल उठाये गए, क्या आपने एक बार भी सोचा की इन छात्रों के पास आगे ज़िन्दगी में सफाई देने का कोई मौका नहीं होगा? क्या आपने, माँ होने के नाते, यह सोचा की यह छात्र अब कभी भी साधारण जीवन नहीं जी पाएंगे?
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