Guest posy by ATUL TIWARI
(प्रगतिशील लेखन के आंदोलन से जुडे हुए प्रसिद्ध पटकथा लेखक अतुल तिवारी ने यह लेख लाहौर में आयोजित फैज़ शताबदी समारोह में प्रस्तुत किया था और फिर दिल्ली में थिंक इंडिया मैगज़ीन के फैज़ नम्बर की रिलीज के समय होने वाले कार्यक्रम में भी उन्होंने यह लेख प्रस्तुत किया । काफिला के लिए लेखक की अनुमति से प्रकाशित। The English translation is given below the Urdu original. – SH)
“हज़रात!
ये जलसा हमारी अदब की तारीख़ में एक यादगार वाक़या है। हमारे सम्मेलनों,अंजुमनों में – अब तक, आम तौर पर – ज़ुबान और उसकी अशात अत से बहस की जाती रही है। यहाँ तक कि उर्दू और हिंदी का इब्तेदाई लिटरेचर – जो मौजूद है – उसका मंशा ख़यालात और जज़्बात पर असर डालना नहीं, बल्कि बाज़ ज़ुबान की तामीर था।…लेकिन ज़ुबान ज़रिया है मंजिल नहीं ।
…अदब की बहुत सी तारीफें की गयीं हैं। लेकिन मेरे ख़याल से इसकी बेहतरीन तारीफ़ “तनक़ीद-ए-हयात” है – चाहे वो मकालों की शक्ल में हो। या अफसानों की। या शेर की। इससे हमारी हयात का तब्सिरा कहना चाहिए। Continue reading लखनऊ और फैज़: अतुल तिवारी






Guest post by TRISHA GUPTA